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Showing posts from December 16, 2020

भूल गए हैं हम

  कभी हम ट्रेन की खिड़की के पास, बस की खिड़की के पास बैठने की जिंद करते थे अपनी मनपसंद चीज के मिलने पर खुश होया करते थे उस दोस्त को जिससे, सबसे ज्यादा हम लड़ते उसे बात करने का मन नहीं ऐसा हम नाटक किया करते थे किसी चीज के न मिलने पर झूठा ही सही रोने का बहाना करते थे .  लेकिन अब जिंदगी में हम सब खुश होने के लिए खुशी भरे गाने सुनते हैं आखिर कहाँ गयी हमारी वो जिंदगी जहाँ फोन जैसी कोई चीज नहीं थी फिर भी हम खुश थे .  अगर आप में अब भी ये सारी शरारत  मौजूद है तो सच में आप अभी नहीं बदले है. जिंदगी की भागदौड़ में  भूल गए हम  हंसना छोटी छोटी चीजों को लेकर उत्साह भरना.