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Showing posts from July 18, 2023

जब सवाल न्याय का हो

रामचंद्र कह गए सिया से  ऐसा कलयुग आएगा,  हंस चुगेगा दान उनका,  कौआ मोती खाएगा।  इस गीत क़ो जब हम पूरा सुनते हैं तब हमारे सामने ऐसी बहुत सी घटनाएं आती है जो हमें बतां ही देती है कि हमारे चारों तरफ बड़ी विडम्बना मौजूद है जहां जिसका नहीं होना चाहिए वो वहीं पर है ∣ ऐसे में जब हम बात न्याय की करते हैं तब स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। जहां न्याय की तलाश में बैठा व्यक्ति उस समय सारी उम्मीद खो बैठता है। जहां उसके साथ अन्याय करने वाला व्यक्ति खुद को न्याय का ठेकेदार मानता है।  जहां कभी किसी दौपद्री की इज्जत पर हाथ डाला जाता है ∣ तो कभी किसी व्यक्ति पर ही पेशाब कर दिया जाता है ∣ हद तो तब हो जाती है जब ऐसे कृत्य करने वाले  शख्स खुद को विजेता मानने लगते हैं। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं रहता है कि न्याय किस चिड़िया का नाम है ∣ ऐसे में न्याय एक आम व्यक्ति के लिए दीया तले अंधेरे की भांति हो जाता है ∣  इसके बावजूद जब हम न्याय  अवधारणा देखते है तो पाते है कि जहां पर व्यक्ति  सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से समान स्थान पाता है ∣ उसका मुख्य गुण तटस्थता, समरूपत...