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Showing posts from April 18, 2021

आज तुम हो केवल काली

चाहती अगर रण में चलना तुम  तो आज तुम नहीं सीता  न ही द्रोपदी  आज तो केवल बल ही बल से जीता  कहने को भले नारी को अबला कहा जाता  किन्तु वो अबला न होकर होती शक्ति की स्वरूपा जो कहते कमजोर हो तुम उन्हें समझाओं काली के नाम की महिमा तुम उन्हें बताओ तु नही सीता  जिसने सिर्फ दी अग्नि पे अग्नि परीक्षा  अपनी पवित्रता का सबूत देते वो  धरती में समा गयी वो अंत में सीता  तुम नहीं द्रोपदी जिसका भरी  सभागार में किया गया वस्त्र हरण जब भीगें हर स्त्री के नयन  फिर भी शर्म से न झूकी दुर्योधन की गर्दन तुम तो हो केवल महिषासुर का वध  करने वाली शक्ति स्वरूपा जिसने किया बड़े बड़े पराक्रमी को   फीका  तुम तो हो शुभ निशुम्भ का वध करने वाली का काली  आज रण पर  उतरो तुम करने अपनी सुरक्षा  नहीं हो तुम आज कोई सीता आज तो तुम केवल हो काली जिसकी भुजाएँ बलशाली .