सुना है मैंने क ई लोगों की जान ली है किन्तु मैं तो पहले ही लापरवाही से मर चुकी थी, आज से ठीक तीन साल पहले एक प्रोजेक्ट के सिलसिले से हम सब को भोपाल गैस कांड की बरसी पर यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में जानें का मौका मिला ∣ जो अवसर कम चुनौती ज्यादा था∣ हम सब ने अब तक उस फैक्ट्री के बारे में बहुत सी बातें और जानकारी पढ़ रखी थी ∣ इसके अलावा भोपाल गैस कांड पर बनी मूवी भी हमने देख रखी थी ∣ पर अब हम उस फैक्ट्री में रिपोर्टिग के लिए जा ही रहे हैं ∣ इसके चलते हमारी बैचेनी हद से ज्यादा बढ़ रही है ∣ पर काम तो काम होता है भला उससे पीछा छुड़ाकर हम सब जाते भला कहां? हम सब हिम्मत कर अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़े चले क्योंकि फैक्ट्री पुराने भोपाल में स्थित है इसलिए हम सब को उसका रास्ता ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ी ∣ सबसे अजीब तो तब हुआ∣ जब हम उस फैक्ट्री बाहर से ही विदा कर दिए गए ∣ पर आखिर हमें तो वहां जाना था इसलिए हम सब कलेक्टर ऑफिस में जाकर उनसे मंजूरी लेने की कोशिश की ∣ हम सब कार्यालय पहुंचे जहां हम सब की पूरी जांच पड़ताल और फैक्ट्री जाने ...
वो बात जो जरूरी है