दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी है स्त्री को सबकुछ मानना सिवाय इंसान के। जहां बंधनों के नाम पर केवल उसे जकड़ा जाया। पर जब बात उसके हक की आये तो कोई कुछ नहीं कह पाये। केवल इसलिए क्योंकि वो केवल एक स्त्री है।
मैं पृथ्वी हूं जिस पर हर कोई अपना हक जमाता पर उस पर कहां कोई तरस खाता मैं वो ही पृथ्वी हूं जिस पर सबको सिर्फ हक जताना आता जिसकी कद्र नहीं किसी को जिसका इस्तेमाल सिर्फ तुम्हें करना आता पर तुम क्यों भूल जाते हो उसके होने से ही तुम हो उसके न होने पर तुम्हारा अस्तित्व ही नहीं है।