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Showing posts from March 23, 2025

Thought Today

दुनिया की सबसे बड़ी त्रासदी है स्त्री को सबकुछ मानना सिवाय इंसान के। जहां‌ बंधनों के नाम पर केवल उसे जकड़ा जाया। पर जब बात उसके हक की आये तो कोई कुछ नहीं कह पाये। केवल इसलिए क्योंकि वो‌ केवल एक स्त्री है। 

World Earth Day

मैं पृथ्वी हूं जिस पर हर कोई अपना हक जमाता  पर उस पर कहां कोई तरस खाता मैं वो ही पृथ्वी हूं जिस पर सबको सिर्फ हक जताना आता जिसकी कद्र नहीं किसी को जिसका इस्तेमाल सिर्फ तुम्हें करना आता पर तुम क्यों भूल जाते हो उसके होने से ही तुम हो उसके न होने पर तुम्हारा अस्तित्व ही नहीं है।