मैं पृथ्वी हूं जिस पर हर कोई अपना हक जमाता
पर उस पर कहां कोई तरस खाता
मैं वो ही पृथ्वी हूं जिस पर सबको सिर्फ हक जताना आता
जिसकी कद्र नहीं किसी को जिसका इस्तेमाल सिर्फ तुम्हें करना आता
पर तुम क्यों भूल जाते हो
उसके होने से ही तुम हो
उसके न होने पर तुम्हारा अस्तित्व ही नहीं है।
Comments