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Showing posts from May 18, 2020

संग्रहालय कहते अपनी जुबनी

मानव संग्रहालय में ये चित्र मानव के हाथ के विकास को दिखता है  . सप्रे संग्रहालय जहाँ हर पुरानी पत्रिका और अखबार मिल जाऐगे" स्मृति का भंडार". मानव संग्रहालय का प्रारभिक द्वारा. जनजातीय संग्रहालय  का द्वारा. आपनी उपस्थिति से ही कह देता है. एक आकर्षित करने वाला दृश्य जहाँ कि स्मृति हर कोई अपने पास रखना चाहेगा. खेल के प्रकार को दिखाने की कोशिश की है. जनजातीय संग्रहालय का ये दृश्य बतता  है गाम्रीण  परिवेश को जिसमें एक व्यक्ति डोल बजा रहा है जबकि  औरत   सिलौटी   जो पहले के जमाने की मिक्सर है उसमें कुछ पीस रही है.

विचार करना जरूरी है इस समस्या पर भी

 आज जब हम खुद  को आधुनिकरण का प्रतीक समझते है तो हमें क्या ऐसी भाषा का प्रयोग करना चाहिए  जो अभद्रता को दर्शाता हो .  सोशल मीडिया पर भी  कुछ लोग इस तरह की अभद्रता (  गालियों  ) का प्रयोग कर लोगों का मनोरंजन कर रहे है . जहाँ कुछ लोग एक दो    गाली  लिखाकर खुद को बड़ा होशियार समझते हैं शायद वो ये सब बोलते वक्त ये भूल जाते हैं कि आज इसी कारण गवार की परिभाषा बदल गयी है पहले गवार उसे कहाँ जाता था जो गाँव अनपढ़ व्यक्ति जो बात 2 पर   गालियों की बौछार करता था लेकिन आज वर्तमान समय में गवार उसे कहा जाता है जो शहरी होकर भी   गालियों   का प्रयोग ऐसे करता है जैसे उसने इसकी भी डिग्री प्राप्त कर ली है. "आज वर्तमान समय में जहाँ एक तरफ लोग बहुत ज्यादा सभ्य हुए हैं वहीं दूसरी तरफ लोग के बातचीत करने के तौर -तरीके में  गाली का प्रयोग भी बढ़ चढ़कर करने लगे   है अगर समय रहते सोशल मीडिया से ऐसे लोगों को बैन न किया गया   वो दिन दूर नहीं जब बच्चे A Apple nahi   अनव शनव    गाल...