आज जब हम खुद को आधुनिकरण का प्रतीक समझते है तो हमें क्या ऐसी भाषा का प्रयोग करना चाहिए जो अभद्रता को दर्शाता हो .
सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग इस तरह की अभद्रता ( गालियों ) का प्रयोग कर लोगों का मनोरंजन कर रहे है .
जहाँ कुछ लोग एक दो गाली लिखाकर खुद को बड़ा होशियार समझते हैं शायद वो ये सब बोलते वक्त ये भूल जाते हैं कि आज इसी कारण गवार की परिभाषा बदल गयी है पहले गवार उसे कहाँ जाता था जो गाँव अनपढ़ व्यक्ति जो बात 2 पर गालियों
की बौछार करता था लेकिन आज वर्तमान समय में गवार उसे कहा जाता है जो शहरी होकर भी गालियों का प्रयोग ऐसे करता है जैसे उसने इसकी भी डिग्री प्राप्त कर ली है.
जहाँ कुछ लोग एक दो गाली लिखाकर खुद को बड़ा होशियार समझते हैं शायद वो ये सब बोलते वक्त ये भूल जाते हैं कि आज इसी कारण गवार की परिभाषा बदल गयी है पहले गवार उसे कहाँ जाता था जो गाँव अनपढ़ व्यक्ति जो बात 2 पर गालियों
की बौछार करता था लेकिन आज वर्तमान समय में गवार उसे कहा जाता है जो शहरी होकर भी गालियों का प्रयोग ऐसे करता है जैसे उसने इसकी भी डिग्री प्राप्त कर ली है.
"आज वर्तमान समय में जहाँ एक तरफ लोग बहुत ज्यादा सभ्य हुए हैं वहीं दूसरी तरफ लोग के बातचीत करने के तौर -तरीके में गाली का प्रयोग भी बढ़ चढ़कर करने लगे
है अगर समय रहते सोशल मीडिया से ऐसे लोगों को बैन न किया गया वो दिन दूर नहीं जब बच्चे A Apple nahi अनव शनव गालिया
रट रहे होंगे समय रहते इस पर ध्यान देना जरूरी है. "
है अगर समय रहते सोशल मीडिया से ऐसे लोगों को बैन न किया गया वो दिन दूर नहीं जब बच्चे A Apple nahi अनव शनव गालिया
रट रहे होंगे समय रहते इस पर ध्यान देना जरूरी है. "
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