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Showing posts from January 14, 2020

विचार

किताब पढ़ते समय ही दुनिया सही लगती है केवल ध्यान अपना किताब की कहानी या किसी विषय पर होता है और कुछ रोचक चीजो को पढ़ते समय लगातार उसे पढ़ते जाते है और चारो तऱफ के घटनाक्रम की कोई जानकारी हमें नहीं होती। समय के साथ दिन कैसे गुजरते चले जाते है मालूम ही नहीं चलता लेकिन रह जाता तो केवल ये है कि आप ने उस समय क्या किया और क्या कुछ जिंदगी ने आपको सीखया। कभी- कभी सबसे अजीब ये लगता है कि आप जिस पर भरोसा करते हो वहीं आपको धोखा देकर निकल जाता है और आप केवल ऱोते जाते हो। जिंदगी का सबसे अच्छा तरीक आज जियो और जिन से मिलो उन से बात करे बुरा भी अगर किसी चीज का लगा जाऐ तो उसे अपने में लेकर रखो और किसी को ये बताने की जरूरत नहीं। उसकी परिस्थिति को समझने की कोशिश करो। आप भले ही कितने भी उच्च शीर्ष पर पहूँचा जाऐं किन्तु जन्म देने वाली मां,पाठ पढ़ने वाले पिता और गलती पर चिल्लाने वाले आपके गुरू उनका हमेशा सम्मान करो। और कभी इन की बातो से आप असहमत भी है चुपचाप उस रास्ते से निकल जाऐं और उनसे मुंह न चलाऐं। बाद में अपनी उस विषय पर अपनी असहमति के कारणो को बताऐं। पूजा

महसूस करने लगे है

अब लोग कुछ मौसम की तरह बदलने लगे है हम ये महसूस सा करने लगे है। कभी हँसना होता था हमारे साथ किन्तु अब रोने से लगे जो कभी बात- बात पर हम टोकते थे अब वही लोग बेटी जैसे हमें पराय करने लगे है कभी जिनकी बातों से हम खुद होते थे अब उनकी बातें ही हमें बोझिल सी लगाने लगी है। कभी बारिश की बूंदे अच्छी लगती थी लेकिन अब अपने भी पराऐ से लगने लगे है जो भी करते थे काम तारीफ अब वो ही थोड़ा बोझिल सा लगे है।

हां मना हमाने भी कभी न कभी

इम्तहान का महत्व हमारी जिंदगी में हो या न हो लेकिन ये हमें एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहूंचता है। 'शून्य से शिखर' तक पहुंचने के लिये हम कई तरह के इम्तहान देने पड़ते है कई बार हम इसे अपना पीछा छूटाते है तो कई बार हम इसमें फंस ही जाते है स्कूल के इम्तहान और जिंदगी के इम्तहान में फर्क सिर्फ इतना होता है कि स्कूल के इम्तहान में हम पढ़कर पास होते है। " किन्तु जिंदगी के इम्तहान में हमें अपने इम्तहान का पेपर स्वयं बनना पड़ता है और भरना भी हमें खुद ही होता है और इसे चेक भी स्वयं को ही करना पड़ता है।