कर्म किसी और के बुरे और सजा किसी और को मिल रही है पाबंदी बढ़ रही पर अपराध करने वाले आजाद चल रहे हैं खौफ में हर कोई पर खौफ वहां अदृश्य हैं जहां खौफ होना चाहिए न्याय की पेंच में उलझ कर रह रही पेंच पर कही किसी न सुनी जा रही है।
वो बात जो जरूरी है