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Showing posts from March 27, 2020

किसी को

किसी को रूलाना  आसान होता है लेकिन हंसाना बिल्कुल भी नहीं किसी को हराना आसान होता है लेकिन जीताना बिल्कुल भी नहीं किसी को याद रखना आसान होता है लेकिन भूलाना बिल्कुल भी नहीं किसी के इश्क़ में पागल हो जाना आसान  होता है लेकिन अपना बनाना बिल्कुल भी नहीं किसी को याद करना आसान होता है लेकिन याद दिलाना  नहीँ किसी के लिए रो जाना आसान होता है लेकिन रूलाना  नहीं अपने दोस्तों के सामने हंसना     आसान  होता है लेकिन रोना बिल्कुल नहीं दूसरों को ताना कसना  आना होता है लेकिन ताना सुनना नहीं किसी को बात बात पर चिढ़ाना  आसान होता है लेकिन खुद के आने पर बिल्कुल नहीं किसी के दिल के पास  आना आसान होता है लेकिन किसी से दूर जाना बिल्कुल नहीं चिड़िया की तरह उड़ना  आसान होता है लेकिन पिंजरे में तोते की तरह रहना नहीं दूसरों को भला बुरा कहना आसान  होता है लेकिन सुनना बिल्कुल नहीं अपने लिए तो हर को...

आने वाला कल

हमारा आने वाला कल कैसा ह़ोगा इसके लिए जरूरी है कि हम अपने आज का उपयोग करें. "कल करे सो आज कर आज करे सो ,अब पल में प्रलय हो जाऐ बहूरी  करे सो कब 🕒❓ 24  मार्च की रात 12 बजे से 21 दिन के लिए  पूरे भारत में लॉक  डाउन  कर दिया गया है अभी  तक  31 मार्च  सभी चीजों बंद थी लेकिन अब 14 अप्रैल  लॉक     डाउन  हो गया है जिसने हम सब  को ये सोचने को     विवश कर दिया है कि हम आखिर अब 21 दिन क्या करेगें? विधार्थी के मन में ये प्रश्न ला खड़ा  कर दिया है कि उसकी कितनी तैयारी है उसनें कितने काम पहले से किये है कितने नहीं  ?  वर्तमान समय में  हम अपने हर समय का उपयोग करे क्यों की जो होली डे हमें इतने लम्बे समय के लिए मिले है मुझे नहीं लगता है आगे हमें इतने दिन की कभी छूट्टी  मिलेगी वैसे भी आप ने एक चीज तो ध्यान दी ही होगी कि समय का पहिया कितना तेज चल रहा है.

बिना रंगमंच को जाने नाटकार की भूमिका अधूरी है

  नाटक आषाढ़ का एक दिन जिसमें विलोम के किरदार को कौन भूल सकता है जो से सच में कालिदास से विपरीत ही था इस नाटक को रंगमच पर हुऐ कोई साल हो गऐ लेकिन ये हमारे जीवन में आज भी रचा बसा है "  बिना रंगमंच के बारे में जाने एक कलाकार अपूर्ण सा होता है .          वहीं दूसरी ओर बात करे गिरीश करनाड के द्वारा लिखित  नाटक नाग मण्डल की तो  वो अपनी अलग ही दर्शकों के सामने आभा बिखेरता है जिसमें अर्पणा अपने पति से प्यार नहीं मिलता उसके पति के स्वरूप में नाग उसे छल करने लगता है  अर्पणा और नाग एक दूसरे को चाहने लगते हैं . इस नाटक में अर्पणा कि कहानी आज के समय की कहानी  पर आधारित है  जहाँ पर लड़की की शादी तो हो जाती है लेकिन उसे अपने पति से वो प्रेम नहीं मिलता जिसकी हकदार वो होती है अर्पणा बिना पंख के चिड़िया के समान हो जाती है जिसकी जिदंगी न प्रेम होता है  न कोई प्रेम का भाव . अगला नाटक तो आज की परिस्थितियों से बिल्कुल मेल खाता है जिसका नाम " आधे अधूरे "हैं . जिसमें पति पत्नी एक दूसरे से नफरत सी करते हैं और ये स...