नाटक आषाढ़ का एक दिन जिसमें विलोम के किरदार को कौन भूल सकता है जो से सच में कालिदास से विपरीत ही था इस नाटक को रंगमच पर हुऐ कोई साल हो गऐ लेकिन ये हमारे जीवन में आज भी रचा बसा है " बिना रंगमंच के बारे में जाने एक कलाकार अपूर्ण सा होता है .
वहीं दूसरी ओर बात करे गिरीश करनाड के द्वारा लिखित नाटक नाग मण्डल की तो वो अपनी अलग ही दर्शकों के सामने आभा बिखेरता है जिसमें अर्पणा अपने पति से प्यार नहीं मिलता उसके पति के स्वरूप में नाग उसे छल करने लगता है अर्पणा और नाग एक दूसरे को चाहने लगते हैं .
इस नाटक में अर्पणा कि कहानी आज के समय की कहानी पर आधारित है जहाँ पर लड़की की शादी तो हो जाती है लेकिन उसे अपने पति से वो प्रेम नहीं मिलता जिसकी हकदार वो होती है अर्पणा बिना पंख के चिड़िया के समान हो जाती है जिसकी जिदंगी न प्रेम होता है न कोई प्रेम का भाव .
इस नाटक में अर्पणा कि कहानी आज के समय की कहानी पर आधारित है जहाँ पर लड़की की शादी तो हो जाती है लेकिन उसे अपने पति से वो प्रेम नहीं मिलता जिसकी हकदार वो होती है अर्पणा बिना पंख के चिड़िया के समान हो जाती है जिसकी जिदंगी न प्रेम होता है न कोई प्रेम का भाव .
अगला नाटक तो आज की परिस्थितियों से बिल्कुल मेल खाता है जिसका नाम " आधे अधूरे "हैं .
जिसमें पति पत्नी एक दूसरे से नफरत सी करते हैं और ये सोचते हैं कि वो दोनो एक दूसरे के बिना अपना पूरा जीवन बीता लेगे लेकिन ये उनकी भूल होती और अंत वो दोनों अपनी गलती को समझ लेते हैं कि वो दोनों एक दूसरे के बिना 'आधे अधूरे' है.
जिसमें पति पत्नी एक दूसरे से नफरत सी करते हैं और ये सोचते हैं कि वो दोनो एक दूसरे के बिना अपना पूरा जीवन बीता लेगे लेकिन ये उनकी भूल होती और अंत वो दोनों अपनी गलती को समझ लेते हैं कि वो दोनों एक दूसरे के बिना 'आधे अधूरे' है.
आज के समय में रंगमंच की प्रासंगिकता शायद इतनी है कि हमारे घर _ समाज और आस- पास से निकली कई कहानी को नाटकार अपनी सूझ बूझ से जब रंगमंच में प्रर्दशित करते हैं तो रंगमंच का महत्व बढ़ सा जाता है.
इसके के साथ आप सभी को विश्व रंगमंच की हार्दिक शुभकामनाएं.


Comments