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Showing posts from October 2, 2020

नाच्यौ बहुत गोपाल बताती है कि प्रेम जाति नहीं पूछता

नाच्यौ बहुत गोपाल  - अमृत लाल नागर  'नाच्यौ बहुत गोपाल' अमृत लाल नागर के द्वारा लिखित  प्रसिद्ध उपन्यासों में से एक है  ∣  इस उपन्यास का मुख्य पात्र  एक पत्रकार शर्मा है ∣ जो अब तक सभी जाति के ऊपर कुछ  न कुछ लिख चुका है ∣ अब वो अनुसूचित जनजाति के लोगों पर लिखना चाहता है ∣ इसके लिए  वो अपने नगर की सबसे प्रतिष्ठित निर्गुनियां से साक्षात्कार करना चाहता है ∣ जो इस उपन्यास की रीढ़  की हड्डी  है ∣  पत्रकार शर्मा काफी मशक्कत के बाद निर्गुनियां से  एक साक्षात्कार ले पाता है ∣ इस साक्षात्कार के माध्यम से  निर्गुनियां अपने जीवन के उन रहस्यों का खुलासा करती है ∣ जो उसे लिए एक बुरे सपने की तरह है∣ जो इस उपन्यास को जिज्ञासु बन पढ़ने को पाठकों को मजबूर करता है ∣ जैसे जैसे निर्गुनियां साक्षात्कार के जरिए अपनी  कहानी कहती है∣  वैसे वैसे पाठकों की दिल की धड़कन बढ़ जाती है ∣  आखिर कहानी में आगे क्या होने वाला है?  इस उपन्यास को पढ़ने का मुख्य कारण है कि ये उपन्यास केवल एक कहानी नही बल्कि हमारे समाज के एक वर्ग के उस दुख क...

गांधी

आज महात्मा गांधी की जयंती पूरे देश में जोर शोर से मनायी जा रही है आज हम  महात्मा गांधी  के उन गुणों के बारें जानते  है जिनसे हम कुछ सीख सकते हैं. १.सत्य के पथ पर चलना _ महात्मा गांधी ने बचपन में 'राजा हरिश्चन्द्र' का नाटक देखा था जिससे उन्होंने भविष्य में कभी झूठ न बोलने  का वचन लिया. २.अपना काम स्वयं करना - गांधी जी का मानना था कि हम अपने काम को स्वयं करे जिससे हम 'आत्मनिर्भर'  होगें  साथ ही साथ हमारी दूसरे के ऊपर से निर्भरता भी काफी हद तक खत्म होगी.  ३.अहिंसा पर जोर देना - गांधी जी का मानना था कि जो काम अहिंसा के बल पर किया जा सकता है उसे हिंसा करके नहीं पाया जा सकता इसलिए आज गांधी जी के जन्म दिन को ' अहिंसा दिवस' के तौर पर मनाया जाता है. ४. छुआछुत का विरोध - गांधी जी हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि सब आपस में एक समान है कोई जाति धर्म के आधार बड़ा या छोटा नहीं है. ५.कमजोर की आवाज बनना - गांधी जी का मानना था किसी भी कानून को बनाने से पहले हमें ध्यान रखना चाहिए कि वहाँ अंतिम पक्ति में बैठे व्यक्ति के लिए भी वह कारगार हो. ६.गलत के लिए आवाज उठाना- गां...