1.वो जीत जीत होती है
जो पायी जाती है
कठोर परिश्रम करके,
जिसके लिए सहते हैं
कभी पांव के छाले
तो कभी समाज के ताने
जिसके लिए अवाम
काबिल नहीं समझती तुम्हें ।
2.जब पा लो उस शिखर को
तो वो जीत पूर्ण चंद्रमा का आकार है लेती
जैसे बाग में फुल की कली है खिलती,
जिसे पाने के लिए ढेरों
अमावस्या का सामना करते हो तुम
शुक्ल पक्ष की भांति तब बढ़ते हो तुम ,
तुम्हारे सामने आते अनेक
ग्रहण
पर हर ग्रहण के सूतक काल
का सामना करते हो तुम ।
3.सावन हो या भादों
हर समय चलते हो तुम
तब जाके पाते हो तुम कामयाबी ,
ऐसे ही नहीं मिलती जिंदगी
में जीत
करनी पड़ती है मेहनत
तब जाके आती है किसी
सूखे खेत में हरियाली,
जीवन भी होता है वृक्ष जैसा
अगर लगते हैं इसमें फल
तब भी ये कितने पत्थर है सहता,
ऐसे ही नहीं मिलती कामयाबी
उसे पाने के लिए दिन रात
मेहनत है करना पड़ता
तब मिलती है जीत ।


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