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Showing posts from August 7, 2020

जब समस्या ही

हम अक्सर अपने दोस्तों से या अपने किसी ऐसे खास इंसान से अपनी मुश्किलें कहते   रहते हैं जैसे सिर्फ हमारी ही जिंदगी में केवल समस्या है और बाकी कि जिंदगी में तो कुछ नहीं .  जबकि हम इस बात से बिल्कुल अनजान होते हैं कि जिस दोस्त से हम ये सारी बातें कह रहे हैं उसकी जिंदगी में भी परेशानी के काले बादल हो सकतें है. आज हमें कुछ चीजों पर जरूर   विचार करना चाहिए कि क्या आज सच में हम जिन्हें   परेशानी समझ रहे हैं क्या वो सच में हमारी परेशानियां है. कि हम बेवजह ही इसे परेशानी मान बैठे हैं दोस्तों में जितना अपने आस पास रहे लोगों को समझ पायी जिनमें भले ही वो  मेरे  दोस्त हो, मेरे अपने  मैंने सबसे बात कर ये पाया कि सबकी जिंदगी में कुछ न कुछ ऐसा है जो कि उसे लगता है कि बहुत बड़ा और एक बहुत बड़ी परेशानी है   . जबकि सच्चाई इसे विपरीत ही है आज हमें उन लोगों के बारे में विस्तार से जानने और समझने की जरूरत है जिनकोे देखकर हमें ये लगता है कि" इनकी जिंदगी तो कितनी अच्छी है किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है " दोस्तों हर सिक्के के दो पहलू होते हैं ...

रवींद्र नाथ टेगोर

साहित्य दो तरह का होता  है एक जो  समाज की वास्तविता को बताए तो दूसरा वो जो  समाज के वर्ग को शिक्षित करने का काम करे और एक नयी राह की ओर समाज को ले जाएं. एक ऐसा ही लेखन ही रवींद्र नाथ टेगो र का है जिनके साहित्य  आनंद मठ से भारत का राष्ट्रीय गीत  "जन गण मन अधिनायक" लिया गया है जो मुख्य  रूप से  बांग्लाभाषा के लेखक हैं. आज समकालीन समय में  लेखन के  अलग- अलग रूप है लेकिन बहुत कम ही लोगों के लेखन ऐसे है जो    कि "तमसोमाज्योतिर्ग मय"   की तरह  है जिसका हिंदी तरह  अंधकार को दूर कर प्रकाश की ओर ले जाना  है.

विचार

  १. जब लगता है न कि किसी ने तुम्हे समझ लिया है तब ही मालूम चलता है तुम्हें समझने वाला  कोई  भी नहीं है. २.आपको आप से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता. ३. किसी चीज को खोने के बाद ही उसकी कीमत मालूम चलती है. ४. जरूरी नहीं कि बड़ी चीज से है   से ही सुकून मिले छोटी चीज भी कभी कभी सुकून देने वाली होती है. ५.किसी पर ज्यादा भरोसा करना  सेहत के लिए  हानिकारक होता है. ६. जब काम खुद को ही करना है तो क्यों न उसे बेहतर करें. ७. कभी कभी मन न होने पर कुछ काम न करना ही अच्छा होता है.