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Showing posts from July 26, 2021

प्रकृति की गोद में

  प्रकृति से प्रेम भले किस को न होगा। जब रहे मन अशांत बैठ जाओं खुली हवा के नीचे हो जाता है मन शांत।  ये प्रकृति हम से कुछ नहीं मांगती, केवल कर दो उसका संरक्षण ये केवल उतने में ही संतुष्ट हो जाया करती।  प्रकृति का सौंदर्य जब देखता है ,शख्स बारिश के मौसम पर तो हर किसी का जी केवल उसे दीदार करने की ओर ही बढ़ता जाता है।  और लगता है निहारते रहो, उस प्रकृति को जहाँ उसके अलावा किसी के होने की जरूरत नहीं होती है। आखिर किसे नहीं पसंद आएगी, पेड़ के पत्तों की आवाज जब कोयल अपनी मधुर ध्वनि में शब्द गुन गुनाएगी । बड़ी ही तसल्ली होती है जब देखों हरे भरे पेड़ का झुंड और पर्वतों में चारों तरफ छाई हुई हरियाली ।जहाँ बैठे तो दोपहर से शाम हो जाएं पर लगे कि अभी तो किया है इसका दीदार  और फिर चल दिया मुसाफिर अपने द्वार । प्रकृति के सौंदर्य पर करूँ हर मंहगी उन चीजों को न्यौछावर जिन्हें कुछ लोग द्वारा समझा जाता है बड़ा उपहार । पर अफ़सोस की बात है बरसात में जिस प्रकृति को निहारने जाते हम दूर दराज बरसात बीतते ही नहीं आती उसकी याद ।   न सागौन का पेड़  न जंगलों की हरियाली,...

सावन सोमवार

  आज  सावन सोमवार की शुरुआत हो चुकी है ।जो कि भगवान शिव का प्रिय माह माना जाता है  । ऐसी मान्यता है ,जो भी सावन सोमवार में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करता है उसकी सभी इच्छा पूरी होती है । कैसे हुई सावन सोमवार की उत्पत्ति पौराणिक कथा के मुताबिक जब समुद्र मंथन में जब अमृत के साथ विष निकला तो देवताओं के साथ असुरों में ये चिंता छा गयी की कि इस विष का पान कौन करेगा ।तब भगवान शिव  ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष का पान कर लिया था।  और भगवान शिव को विष के प्रभाव के कारण उनका पूरा शरीर जलने लगा था तब इंद्र देव ने बारिश की थी जो सावन सोमवार के माह के रूप में जाने जाना लगा  ।