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Showing posts from February 6, 2024

जब मौतें सस्ती हो जाती है

  वहां आज हर चीज के दाम आसमान छू रहे थे। जो आम आदमी की पहुंच से दूर हो रहे थे। दो पैसे को तरसे वो नंगे बदन जो आज अपनी ही पहचान से दूर हो रहे थे। जो आएं थे कमाने दो पैसे वो आज गुमनामी के बीच खाक हो रहे थे।   जहां सबकुछ मंहगा कुछ भी सस्ता न था। वहां न जानें क्यों आज इस दुनिया को छोड़ जाने वालों के दाम उनकी जिंदगी के मुकाबले कम हो रहे थे।