स्कूल से लेकर कॉलेज तक में सबकी अगर कोई एक प्रबल अभिलाषा होती है तो वो सबसे अच्छा एक स्टूडेंट बनने की होती है जिस तरह स्कूल में ' मिस एक्सीलेंस, मिस मॉडल, मिस नूतन, मिस कमला नेहरू बनाया जाता है वैसे ही कॉलेज के स्तर में 'स्टूडेंट आफ द ईयर' बनना हर कोई छात्र का ख्वाब होता है जिसे लेकर वो कॉलेज में अपना कदम रखता है जहाँ क ई सपने उसके केवल इसलिए टूट जाते हैं कि वो वहां के वातावरण से बहुत प्रभावित होता है वही दूसरी ओर वो बाहर की चकाचौंध भरी जिंदगी में खुद को कम आंकने लगता है कि वो कुछ ज्यादा ही अभिलाषा कर रहा है यहाँ पर कुछ काम आता है तो वो उसका खुद का जुनून और मेहनत खुद पर विश्वास. हम अक्सर सुनते आए हैं कि स्कूल में जो पढ़ा वो कॉलेज में काम नहीं आता कॉलेज में जो पढ़ा वो पेशवर जिंदगी में काम नहीं आता सबके अपने नियम कायदे होते हैं हम भले स्कूल से लेकर कॉलेज तक पढ़ते हैं किन्तु हमारी असली पढ़ाई कॉलेज से पढ़ने के बाद शुरू होती है जहाँ हमारी गलती करना सामान्य नहीं होता जहाँ खुद की पराकाष्ठा बनाए रखने के लिए हर दिन आज से अब बेहतर करना होता है. 𝐒𝐭𝐮𝐝𝐞𝐧𝐭 ?...
वो बात जो जरूरी है