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Showing posts from October 4, 2021

सहन करने की सीमा जब हद से पार हो जाए तो

  " ईशा ने नहीं कहा कि दूगां सदा स्वच्छ नीला आकाश फूल भरी  राहे जीवन भर  बिन बादल और बिन बरसात बिना दुख के आनंद न होगा न शांति बिना प्रलाप " अक्सर हम किसी विजयी इंसान को देखकर ये भूल जाते हैं कि उसने भी कभी कुछ सहा होगा जब जाकर आज वो इस पद पर है ∣ हमें लगता है कि मानों उस शीर्ष पद पर बैठे इंसान के जीवन में केवल सुख ही सुख है ∣ ऐसा सोचते वक्त हम ये भूल जाते हैं कि  सबकी जिंदगी में दुख और सुख आते और जाते हैं ∣ महज फर्क इतना हो जाता है कि कुछ लोग दुख की पीड़ा से इस कदर टूट जाते हैं तो कुछ लोग  इतना मजबूत बन जाते हैं जिनके आगे  पत्थर की कठोरता भी फीकी पड़ जाती है ∣ जिंदगी जीना भी क्या आसान होता है?  जहाँ सिर्फ हमारा इम्तिहान होता है जहाँ हमे भी लगने लगता है कि इस जिंदगी में कितना संघर्ष छिपा हुआ है ∣ अब और नहीं इस इम्तिहान को हमें बढ़ने देना है जिस इम्तिहान के शुरू की तारीख हमें मालूम होती है पर खत्म होने की तारीख अज्ञात सी होती है ∣ जहाँ अक्सर हमें मिल जाते हैं इतने दुख की अक्सर हम सिर्फ रोते रह जाते हैं न होता है एक वक्त के लिए कोई सहारा सब से हम अप...