जवाबदेही किसी की न हो उपलब्धि सब की लापरवाही किसी की न हो जहां तारीफ सुनने की चाह सबकी पर नाराजगी का कारण सुनने की इच्छा किसी की न हो। जहां बैचेन सब हो पर प्रश्न करने की हिम्मत न हो तब जैसे प्रश्न जरूरी हो जाता है जब अपना अपना देखने के चक्कर में किसी की जिंदगी सस्ती हो।
वो बात जो जरूरी है