असफलता दिखाती है नयी राह इस शीर्षक में वो बात है जो अक्सर हम नहीं देख पाते कलाम की अग्नि की उड़ान पढ़ने पर ये मालूम चलता है कि कलाम का संघर्ष कभी न रूकने वाला था जिसमें व़ो क ई चीज को पाने में असफल हुए किन्तु उन्होंने कभी हार नहीं मानी परिस्थितियों से लड़ा और जीवन को बेहतर किया. डॉ कलाम का जन्म वैसे तो 15 अक्टूबर 1931 में तमिलनाडु के रमेश्वरम् जिले में हुआ था किन्तु उनका संघर्ष उन्होंने ऐसी ऊंचाई पर ले गया जहाँ पर वो कलाम से मिसाइल मैन कहलाएं. जो न सिर्फ एक अभियंता इंजीनियर रहे बल्कि व़ो भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में भारत की जनता के बीच आएं. सयुंक्त राष्ट्र ने कलाम के 79 वें जन्मदिन को विश्व विद्यार्थी दिवस घोषित किया. कलाम ने भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान pslv - 3 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 17 जुलाई 1983 को रोहिणी उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित भी किया. "अग्नि मिसाइल और पृथ्वी मिसाइल का सफल परीक्षण उनकी देन है" भारत में 1998 में पोखरण का दूसरा सफल परीक्षण उनकी उपस्थिति में हुआ. कलाम भारत को व़ो दे गए जिसकी कल्पना आज भी करना मुश्किल स...
वो बात जो जरूरी है