"आनंद मूवी" आनंद मूवी जिसकी कहानी में आनंद नाम का लड़का रहता है जिसे कैंसर रहता है वो भी लास्ट स्टेज पर पहूंच चुका होता है और ये सब आनंद को मालूम होता है कि वो सिर्फ छ: महीने में मरने वाला है लेकिन वो उस छ: महीने को रोकर नहीं बल्कि हर किसी को हंसाकर मरता है. इस मूवी में आनंद बहुत हंसमुख किस्म का होता है जो अपनी मौत का ही मजाक उड़ा रहा होता है सबसे हंस बोल रहा होता है वो किसी भी अनजान व्यक्ति को बाबू मुसायरे कहा कर पुकार रह होता है जब उसका दोस्त उसे पूछता है कि ये बाबू मुसायरे कौन है ?तो वो हंसकर कहता है कि बाबू मुसायरे तो कोई भी नहीं. इस मूवी का डायलॉग जो सच में जिंदगी के प्रति हम सब का नजरिया बदल देता है कि " जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लम्बी नहीं " . इस मूवी में सबसे प्रभावित करने वाली अगर कोई चीज है तो वो ये है " कि जो सबसे ज्यादा बात -बात पर हंस रहा होता है वो ही अंदर सबसे ज्यादा रो रहा होता है ". बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो हमेशा दूसरे को हंसाने की कोशिश में लगे रहते हैं उन्हें देखकर लगता है कि उनसे ज्यादा...
वो बात जो जरूरी है