बिना दुख के आनंद न होगा न शांति बिना प्रलाप। आज के समय में हम सब अपने जीवन में फूल की कामना तो कर लेते है ∣ किन्तु ऐसा करते हुए ये भूल जाया करते है। कि सुख और दुख हमारे जीवन का अमूल्य हिस्सा है। जो हम सबके जीवन में आता और जाता है ∣ इसे हम पाकर सीखते और जीवन के एक नए पहलू को जानते हैं ∣ तब वास्तविक रूप में महसूस कर पाते हैं ∣ जिंदगी जीना सच में बहुत मुश्किल है। इसके बावजूद हमें अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए सुख दुख को सह आगे चलते जाना होगा।
वो बात जो जरूरी है