उधार चाहे किसी चीज का हो सबको अदा ब्याज सहित ही करना होता है ∣ वो लोग आज उसे गलती बता रहे हैं ∣ जो स्वयं उस गलती को करते बड़े हुए है ∣ सच में आज जमाना बदल गया है जहां लोग बुराई भी मित्र और दोस्त में फर्क समझकर करते है ∣ किसी दूसरों के उधार सपनों से बेहतर असफल हो जाना होता है ∣ इंसान वहां गलतियां करना शुरू कर देता है ∣ जहां उसे लगने लगता है कि वो केवल समझदार व्यक्ति हैं ∣ बाकी सब मूर्ख है ∣ वो लोग जो एक लड़की का घूंघट करना सही मानते हैं उन्हें कौन समझाएं वो घूंघट एक समय मर्यादा नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए लाया गया था।
वो बात जो जरूरी है