तो दृश्य कुछ ऐसा होता है चुनाव वो वक्त , जब हर किसी को वोट देने काम पूरा करना होता है। कोई इसे अपनी जिम्मेदारी समझता है तो कोई उसे अपने सिर का दर्द समझता है। पर वो वोट देने जरूर ही जाता है। फिर भले ही वो नोटा का ही क्यों न भक्त हो किन्तु वो अपना कर्तव्य निभाना नहीं भूलता है। हालांकि जब बात गांव में वोट देने की आती है तब उसका दृश्य ही थोड़ा अलग सा होता है। इन्हीं में से कुछ दृश्य की आज हम बात करने वाले है... सबकी तरह हम में भी उस दिन वोट देने का थोड़ा उमंग सा था। आखिर शहर से निकलकर हम पहली बार गांव में वोट देने का सौभाग्य प्राप्त कर रहे थे। अब तक हमने श्रीलाल शुक्ल की रागदरबारी से ही गांव के चित्र को जाना समझा था किन्तु अब बात जैसे उसके प्रत्यक्ष दर्शन करने की थी। तो हम भी वोट देने चल पड़े । जानकारी लेने पर हमें मालूम चला कि एक शासकीय स्कूल में हमें अपना वोट देना है। स्कूल का रास्ता पूछते पूछते हम आखिरकार उस गांव पहुंच ही गए। उस शासकीय स्कूल में, जहां की दीवारों में शिक्षा को लेकर बड़े बड़े विचारों को लि...
वो बात जो जरूरी है