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Showing posts from April 27, 2020

थोड़ा उनके लिए भी सोच लो

लॉकडाउन  का प्रभाव अब घर पर भी दिखने लगा है  घर  की वस्तुऐं धीरे- धीरे ख़त्म होने लगी है. अब तो हर चीज सोच समझ कर खरीदनी  पड़ती  है क्योंकि अब धीरे धीरे लोगों के पैसे भी खत्म हो रहे हैं और मंहगाई ने आम जनता की कमर तोड़ रखी है . हम अपनी परिस्थिति देखकर उन मजदूरों की हालात समझ ही सकते हैं जिनकोे रोज की मजदूरी केवल 100 से 200 रूपये मिलती थी जो काम  अभी बंद  है हालांकि सरकार द्वारा ये प्रयास किया जा रहा है कि व्यक्ति को राशन पानी मिल ही जाऐं लेकिन अभी भी इसमें सुधार की जरूरत है. "मेरा आप सब से केवल इतना ही कहना है इस   लॉकडाउन  में इतना तो सीख ही लीजिएगा कि आप जो भी खाना खा रहे है वो भी लोग को भरपेट नसीब नहीं हो रहा है इसलिए थाली में उतना ही ले जितने की जरूरत है हो और हफ्ते में एक दो दिन किसी गरीब को खाना खिलाने का कष्ट करे क्योंकि     ऐसे बहुत से  लोग है जो केवल एक वक्त खाना खाने को मजबूर है."

विचार करने वाली बात है

**दर्द में नींद न आना आम बात है फिर चाहे वो पैरो का दर्द हो या फिर वो दांत का दर्द हो. **.किसी को उसकी गलती पर चिल्लाना बहुत आसान है लेकिन उसे माफ करना उतना ही कठिन है .  **आज के समय का हीरो वही होगा जो इस समय अपने काम को घर पर ही  करता होगा .  **स्वास्थ्य की कीमत उसके खराब होने पर ही मालूम चलती है .