कुछ बेहतर करने की आशा में चल गुजरने की आशा में ऐसा कुछ नया करने का ख्वाब हो तेरा कुछ बेहतर बनने की आशा में , जैसे कितनी भी काली रात हो सुबह त़ो होती हर हाल में कुछ कर गुजरने की आशा में , बिजलियां गिरती है तो गिर जाने दे अपनी कहानी में और भी थोड़ा कर जाने की आशा में , कांच के घड़े की तरह होती ये जिदंगी जब तक है इसे सजाने सवारने की आशा में , पराए क्या अपने भी भूल जाएगे तुझको एक दिन जब तक जिंदगी है बेहतर बनने के लिए अपने संघर्ष की हद पार करने की आशा में
वो बात जो जरूरी है