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Showing posts from September 9, 2020

चल गुजरने की आशा में

कुछ बेहतर करने की आशा में चल गुजरने की आशा में ऐसा कुछ नया करने का  ख्वाब  हो तेरा कुछ बेहतर बनने की आशा में , जैसे कितनी भी काली रात हो सुबह त़ो होती हर हाल में कुछ कर गुजरने की आशा में , बिजलियां गिरती है तो गिर जाने दे अपनी कहानी में  और भी थोड़ा कर जाने की आशा में , कांच के घड़े की तरह होती ये  जिदंगी जब तक है इसे सजाने सवारने की आशा में , पराए क्या अपने भी भूल जाएगे तुझको एक दिन जब तक जिंदगी है बेहतर बनने  के लिए अपने संघर्ष की हद पार करने की आशा में