तु ही तू घर में भी तू बाहर भी तू दुर्गा भी तू काली भी तू मेरा आज तू मेरा कल भी तू सुबह से उठकर रात के सोने तक कितना काम कर जाती तू कभी मां बनकर लोरी सुनती तू कभी पत्नी बनकर पति का हाथ बांटती तू कभी बहन बनकर भाई को सही राही दिखती तू। आज के समय आफिस तू भी जाती घर और बाहर दोनों काम तू झट से कर जाती तू। कभी अग़ेजो को नाको चने चबती तू कभी झांसी के लिए बेटो को पीठ में रखकर पूरा युद्ध लड़ जाती तू कभी धर्म पत्नी बनकर अपने पति के प्राण यमराज से भी ले आती तू कभी कांटों में भी चलकर पति के साथ चौदह वर्ष वनवास कर आती तू तू ही तू। घर में भी तू बाहर भी तू हमेशा अग्नि परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाती तू आज के समय में दफ्तर और घर दोनों में बेहतर काम करती जाती तू कभी पीवी, सिन्धु तो कभी दुतीचन्द कभी मैरी काम बनकर स्वर्ण पदक लाती तू कभी अर्थ शास्त्र की विशेष ज्ञ गीता गोपीनाथ न बना जाती तू कभी एक ताकतवर महिला के रूप में जर्मनी की चांसलर ऐजेला मार्कल कहलाती तू कभी अपने संघर्ष की करती इवाका जैसी बेटी बना जाती तू भारत में तू लंदन में भी तू।
वो बात जो जरूरी है