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Showing posts from October 27, 2023

अकेलेपन में सिमटते हम

आज समय का पहिया भले काफी तेजी से चल रहा हो किन्तु इससे लोगों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है ∣ वो एकांत अवस्था में रहने के आदि से बनते जा रहे हैं ∣ जहां उन्हें दुनियादारी से कोई भी मतलब नहीं रह गया है ∣  जहां अब हमें उस दुनिया के बारे में रूचि नहीं है ∣ आज एक पल भी खाली बैठकर सोचने से बेहतर हम  कुछ मनोरंजन चाहते है ∣ जो हमें दुनिया की चिंता से कहीं दूर ले जाएं।  आज वास्तव में हम ने कुछ नया जानने की जिज्ञासा खो सा दी है ∣   हमारे आस पास क्या हो रहा है इससे अब हमें कोई भी मतलब नहीं रह गया है ∣