कहते है इतिहास बनाने के लिए इतिहास पढ़ना जरूरी होता है..व्यक्ति इतिहास पढ़कर इतिहास में हुई गलतियों से सबक लेकर आगे की ओर बढ़ता है...लेकिन जब किसी के बारे में पूरा इतिहास ही न लिखा गया हो, तब उसके बारे में चर्चा करना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है.. हम बात कर रहे है देवी अहिल्याबाई होल्कर की..जिनका नाम इतिहास में कहीं गुम हो गया.. महाराष्ट्र की धरती पर जन्मी अहिल्याबाई होल्कर ने बतौर महिला शासिका के रूप में काम किया..जिनके कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता, न्यायप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है... . जिसकी बदौलत उन्होंने बतौर शासिका के रूप में अनगिनत कार्य किये..जिनमें से कुछ इस तरह से है- सामाजिक सुधार - अहिल्याबाई होल्कर ने सती प्रथा को खत्म करने की कोशिश की..जिसके एवज में उन्होंने विधवा पुर्नविवाह पर जोर दिया... राजकीय कोष - अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में राजकीय कोष की अवधारणा को एक पारदर्शी रूप दिया..जहां उन्होंने ये बताया कि राजकीय कोष का हिसाब जनता को पता होना चाहिए...उसका उपयोग अपने व्यक्तिगत हित के लिए न करके प्रजा के हित में करना चाहिए... महिला सशक्तिकर...
वो बात जो जरूरी है