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Ahilyabai Holkar: कौन थी अहिल्याबाई होल्कर




कहते है इतिहास बनाने के लिए इतिहास पढ़ना जरूरी होता है..व्यक्ति इतिहास पढ़कर इतिहास में हुई गलतियों से सबक लेकर आगे की ओर बढ़ता है...लेकिन जब किसी के बारे में पूरा इतिहास ही न लिखा गया हो,  तब उसके बारे में चर्चा करना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है..

हम बात कर रहे है देवी अहिल्याबाई होल्कर की..जिनका नाम इतिहास में कहीं गुम हो गया..
महाराष्ट्र की धरती पर जन्मी अहिल्याबाई होल्कर ने  बतौर महिला शासिका के रूप में काम किया..जिनके कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता, न्यायप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है....जिसकी बदौलत उन्होंने बतौर शासिका के रूप में अनगिनत कार्य किये..जिनमें से कुछ इस तरह से है-
सामाजिक सुधार- अहिल्याबाई होल्कर ने सती प्रथा को खत्म करने की कोशिश की..जिसके एवज में उन्होंने विधवा पुर्नविवाह पर जोर दिया...
राजकीय कोष- अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में राजकीय कोष की अवधारणा को एक पारदर्शी रूप दिया..जहां उन्होंने ये बताया कि राजकीय कोष का हिसाब जनता को पता होना चाहिए...उसका उपयोग अपने व्यक्तिगत हित के लिए न करके प्रजा के हित में करना चाहिए...
महिला सशक्तिकरण- महेश्वरी साड़ी को लाने का श्रेय अहिल्याबाई होल्कर को जाता है..जिन्होंने महेश्वरी साड़ी के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करने के बारे में सोचा...जिसके निर्माण का पूरा जिम्मा महिलाओं को सौंपा..जो आज महेश्वरी साड़ी के रूप में मध्यप्रदेश की पहचान बन चुकी है...
मंदिरों का पुर्ननिर्माण- अहिल्याबाई होल्कर ने औरंगजेब के द्वारा नष्ट किये गए मंदिरों का पुर्ननिर्माण कराया..जिसमें काशी विश्वनाथ प्रमुख मंदिरों में से एक है..
जनजातीयों को सम्मान- मध्यप्रदेश में पायी जाने वाली भील और गोड़ जनजाति को जल, जंगल, जमीन पर अधिकार दिलाने का काम देवी अहिल्याबाई होल्कर ने किया था..

बहुजन हिताय बहुजन सुखाय की परिकल्पना को काफी हद तक हम अहिल्याबाई होल्कर के शासनकाल में पूरा होते देखते है..जिन्होंने प्रजा के हित से अलग कोई काम नहीं किया..जो महिला सशक्तिकरण का एक बेहतर उदाहरण है...

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..