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Showing posts from March 9, 2020

त्यौहार

होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार है जिसमें रंगों का अपना अलग ही महत्व होता है ऐसा दिन जिस दिन किसी को भी रंग लगाकर बड़े मजिकिये  रुप में कह दो बुरा न मानो होली है। दोस्तों और परिवार के संग खुशी बांटने का त्यौहार। अपनो संग खुशी बाटने का त्यौहार। त्यौहार तो हर साल आते हैं लेकिन समय और लोग नहीं कोई आज अपना होता है तो कोई कल नहीं। हमें त्यौहार के साथ अपनों का भी ख्याल रखना चाहिए । दोस्तों आज के मिले कल लोग नहीं मिलते इसलिए जो लोग आज हमें  मिल रहे हैं उनसे खुलकर बातचीत करे। अपने अलावा अपनो के लिए सोचे और  त्यौहार मनाऐ।

याद आते हैं।

   कुछ गाने जो हमें आज भी इतने अच्छे लगते हैं जो हमारे दिल से लेकर दिमाग तक  रच बस जाते हैं।                      पुराने समय के गानों की अपनी अलग ही विशेषता है जिनको सुनकर हम कभी बोर नहीं होते हैं।  जिनमें राज कपूर के प्रमुख गाने " जीना इसी का नाम है, जाने कहाँ गाए वो दिन, जिस देश में गंगा बहती, है इसके अलावा मधुवला के गाने जिनको सुनते रहना का मन करता है जिनमें " जब प्यार किया तो डरना क्या। " वैजती  माला  और दिलीप कुमार का "सुहाना सफर और मौसम यही "।  "कुछ इतना अच्छा लिख दिया जाता है कि भूलया नहीं जाता कुछ इतना असर करता है कि बताया नहीं जाता कोई गान इतना अच्छा लगा जाता है कि उसे भूल ही  नहीं जाता। "                                        वर्तमान समय के कुछ गाने जो बहुत ही दिल को छूने वाले है जिनमें आशिकी 2के गाने, विलन के गाने    ऐतिहासिक मूव...

होलिका दहन

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा हिरण्यकश्यप नाम का एक राजा था जिसने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की और वरदान स्वरूप ये मांग की कि मुझे कोई भी स्त्री और पुरुष के दूवारा नहीं मारा जाऐगा न दिन और न रात में मार जाऐगा न दरबार के अंदर और न बाहर मारा जाऐगा। भगवान विष्णु उसकी सभी मांगो को पूरा कर देते हैं । वरदान पाकर हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान समझने लगता है और अपनी पूजा करने को कहता है। उसका पुत्र प्रहलाद होता है जो दिन रात भगवान विष्णु की पूजा उपसाना करता है हिरण्यकश्यप उसे पसन्द नहीं करता और उसे समझता है लेकिन वो किसी की नहीं मानता जब हिरण्यकश्यप उसे मारने का आदेश देता है। उसे गर्म कडाई में डाला जाता है लेकिन वो भगवान की कृपा से तेल भारी कड़ाई में फूल बरसाने लगाते हैं। उसकी सारी योजना असफल हो जाती है। तब हिरण्यकश्यप की बहन " होलिका " ये तरकीब सूझती है कि मुझे तो भगवान बाह्रा  का वरदान प्राप्त है कि मैं अग्नि में नहीं जलूगी  मैं प्रहलाद को लेकर बैठ जाऊगी । योजना अनुसार ये कार्य होता है होलिका अपने भतीजे को लेकर बैठती है प्रहलाद बच जाता है और होलिका का " वरदान श्राप में ...