धरती मेरी माता पिता को कहते आसमां हो फिर भी तुम उस धरती पर क्यों कूड़ा फेंकते हो? क्यों तुम नहीं रखते उसका मान क्यों तुम नहीं देते ध्यान क्यों तुम पृथ्वी का नहीं देते ध्यान? आज जब पृथ्वी पर लोगों का बोझ लगातार बढ़ रहा है तुम अपने लिए बना रहे आशियाना क्यों तुम नहीं दे रहे हो ध्यान ? अगर अब भी न माने तो वो दिन दूर नहीं जब तुम सिर्फ पछताओगे तुम्हारे हाथ में नहीं बचेगा कुछ तुम सिर्फ पछताओगे आज जब धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा जब पेड़ों की संख्या लगातार घट रही उसके बावजूद तुम नहीं दे रहे ध्यान क्यों तुम विकास की आंधी दौड़ में पृथ्वी का नहीं दे पा रहे ध्यान ।
वो बात जो जरूरी है