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Earth Day Poem in Hindi:पृथ्वी को तुम




धरती मेरी माता
पिता को कहते आसमां हो

फिर भी तुम उस धरती पर क्यों कूड़ा फेंकते हो?
क्यों तुम नहीं रखते उसका मान
क्यों तुम नहीं देते ध्यान
क्यों तुम पृथ्वी का नहीं देते ध्यान? 
आज जब पृथ्वी पर लोगों का बोझ लगातार बढ़ रहा है
तुम अपने लिए बना रहे आशियाना
क्यों तुम नहीं दे रहे हो ध्यान?

अगर अब भी न माने तो
वो दिन दूर नहीं जब तुम सिर्फ पछताओगे
तुम्हारे हाथ में नहीं बचेगा कुछ
तुम सिर्फ पछताओगे 
 आज जब धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा
जब पेड़ों की संख्या लगातार घट रही
उसके बावजूद तुम नहीं दे रहे ध्यान क्यों तुम विकास की आंधी दौड़ में पृथ्वी का नहीं दे पा रहे ध्यान ।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..