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Showing posts from October 10, 2020

मरना तो है ही एक दिन

मरना तो है ही एक दिन  क्यों मरते हो तुम हर दिन तुम क्यों भ्रम में जी रहे हो कि तुम भीष्म हो तुम तो हो एक पेड़ जो आज हरा कल सूख जाएगा मरना तो है ही एक दिन,  आज तो तुम उस पेड़ की तरह हो जिस पर फल लगने पर कितने पत्थर पड़ते हैं क्या वो जीना छोड़ देता है जो प्रगति की ओर बढ़ता है उसी पर तो दुख का पहाड़ टूटता है,  वो जिंदगी को क्या जीना कहेगे जहाँ न दी तुमने किसी  कुछ सीख,  तो जीवन भी क्या जीवन  जहाँ जीने और मरने नहीं है कोई अंतर शेष,  जीने के लिए दम चाहिए क्या दीपक ने साहस जुटाया हवा तो आती रहती जोर शोरो से किन्तु दीपक फिर भी न बुझ पाया, हवा तूफान से डरना कैसा  इसी ने तो जीवन जीना सिखाया मरना तो है एक दिन आज फिर दीपक  जोरों की हवा से बूझ न पाया .