Skip to main content

Posts

Showing posts from May 30, 2021

क्या कहे तेरे दस्तुर को

जब लगे कि जिंदगी में सब कुछ सही हो गया है ∣ तो आती है एक ऐसी आंधी कि मालूम चलता है जिंदगी में सबकुछ बिखरा हुआ है ∣ हम रोज सोकर उठते इसमें नया क्या है? पर क ई बार हम अपने जीवन की दिनचर्या को पूरा करने ऐसे असमर्थ हो जाते हैं ∣  तब हमें मालूम चलता है ∣ दैनिक दिनचर्या की करने की अहमियत, जिसे हम अक्सर नजर अंदाज कर देते हैं जरूरी नहीं हर सुबह हर दिन जैसी हो  क ई बार उसे पूरा करने में  ही हम असमर्थ हो जाते है जब केवल लेटे रहने के अलावा कुछ नहीं हम सोच पातें है तब मालूम चलती है जिंदगी की एक ओर वास्तविकता की हम केवल बाहर ही नहीं खुद से भी अंदर  लड़ते हैं ∣ जब शरीर का दर्द आगाह करता है हमने क्यों उसका ध्यान नहीं दिया  ? परीक्षा में ज्यादा नंबर आ जाए तो बड़ा गर्व करते है हम, पर जब मेडिकल रिपोर्ट में आ  जाए शरीर में किसी चीज की कमी  तो क्यों नजर अंदाज करते हैं हम खुद को पाने के चक्कर इस शरीर को भूल जाते है हम जिंदगी में आती है अनेक परीक्षा क्या हर परीक्षा को पास कर जाते है हम ? कुछ परीक्षा  में तो हम जाते ही नहीं है और कुछ परीक्षा के  लिए हमारी ...