वो दोस्ती भी क्या दोस्ती थी सुबह जब मिलते थे तो कितना ज्यादा हँस बोल लेते थे। न होती थी चिंता किसी चीज की, न जाने कितने दिन हम चैन से सोया करते थे। आज मालूम पड़ी उस दोस्त की कीमत जिसके जाने से हम अब हम रोए करते है। हर दुआ पूरी हो मेरे दोस्त की ऐसी खुद से हर रोज दुआ किया करते है।
वो बात जो जरूरी है