https://poojabhopal.blogspot.com/2021/01/blog-post_12.html " उठो जागों और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए"। स्वामी विवेकानंद का ये विचार आज भी हर युवा के मन मस्तिष्क में इस तरह से रचा बसा हुआ है ∣ कि जब भी वो खुदा को निराशा से घिरा हुआ पता है ∣ तब वो अपने मन मस्तिष्क में स्वामी विवेकानंद के उन विचारों को खोजने लगता है जो उसे प्रकाश की ओर ले जाएं ∣ आज जब प्रश्न खड़ा होता है कि 21 सदी में स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता है ∣ तो इसका समर्थन करने में बिलकुल भी देरी नहीं लगती है ∣ आज के समय में विवेकानंद के विचारों जिनकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है ∣ 1. हजारों ठोकरें खाने के बाद ही एक अच्छे चरित्र का निर्माण होता है ∣ स्वामी विवेकानंद के मुताबिक एक व्यक्ति हजारों ठोकरें खाने के बाद ही अच्छे चरित्र का निर्माण कर पाता है ∣ जब इंसान को ठोकर लगती है तब ही वो खुद की अहमियत को समझ पाता है ∣ वो खुद के चरित्र निर्माण कर पाता हैं ∣ जब वो अपने जीवन में मुसीबतों का सामना करता है ∣ तब वो उस से लड़कर एक नया विचार ग्रहण करता है ∣ वो खुद का एक न...
वो बात जो जरूरी है