रोज उसका इंतजार करना, कभी ज्यादा तो कभी कम समय में उसे लेना और अपनी मंजिल पर निकलना, जिसके लिए कभी दौड़ना ,तो कभी उसके छूट जाने का दुख मानना ∣ मैं बात कर रही हो उस यात्रा की जो हम से ज्यादा लोग हर रोज करते हैं ∣ कभी कभी तो हम उससे तंग आकर ये भी सोचने लगते हैं कि कितनी अच्छी उन लोगों की जिंदगी होती है ∣ जो इस तरह के कष्ट से दूर रहकर अपने व्यक्तिगत वाहन से आते जाते हैं ∣ न रोज रोज किराए की झझट न ही रोज रोज की बस के लिए दौड़ भाग करते हैं ∣ पर इसके बावजूद हम इस यात्रा के बीच हम ऐसे स्वाद को चखते है ∣ जो हमें बता ही देता है ∣ कि समय की कीमत क्या होती है ? भरी बस में अगर हमें सीट मिल जाएं तो उसकी खुशी क्या होती है ? कई बार तो हम इस यात्रा में अपने उन लोगों से भी मिल जाते हैं जो एक समय तक हमारे सबसे से करीब थे ∣ पर आज वो जैसे हमारे लिए अजनबी से हो गए है ∣ यहां पर सबकी अपेक्षा एक दूसरे से ज्यादा होती है जैसे अगर हम किसी ऐसी सीट पर बैठे है ∣ जिसके शीशे पूरे खुले है ∣ किन्तु उसके एक तरफ छांव दूसरी तरफ धूप है ∣ ये ज्यादा सम्भावना है ∣ जिस सीट ...
वो बात जो जरूरी है