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Showing posts from November 25, 2021

स्त्री तेरी कहानी

स्त्री तेरी कहानी खुद  के नहीं ओरो की जुबानी जहां तु है कभी किसी घर की बेटी तो कही किसी घर की बहु,  जहां हर दिन देती तु क ई परीक्षा जिसका परिणाम त़ो जैसे हर दिन लोगों के मुंह पर रहता,  कितनी भी तु पा ले कामयाबी पर तुझे सराहा  कम ही जाता,  घर की हर परिस्थितियों का भार     तो जैसे तेरे   सिर  पर  रहता,  जब होती तु अपने मायके में  तो कहते पराया घर जाना   है तुझे जब ससुराल जाती तो कहते पराये घर से आयी तु,  जहां बात बात पर  जैसे तेरे मायके को जलील किया जाता कम बोले तो गूंगी है ज्यादा बोले तो बातूनी  है तु,  सब से बात करे तो चरित्र पर उगुली उठा देते हैं कम बात करें तो घमण्डी बात देते हैं ∣ जो अगर घर की गृह स्थिति को संभाले  तो कहेगें काम ही क्या करती बाहर काम करें तो सबकी नजर शाम से पहले उसके  घर आने की   होती है जहां उसके मोटे होने पर कहते हैं ज्यादा खाती हैं दुबाली  हो तो हवा खाती,  जहां उस पर तरस जैसे किसी को न आती है जब करती वो  बराबरी  तो उसे तुम कमज...