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Showing posts from August 31, 2020

अब नहीं सोचा तो

आज क्या हम अनुमान लगा सकते हैं कि हमारी स्थिति बिल्कुल वैसी है जैसी पहले थी. आज बात करते हैं हम अपनी आर्थिक स्थिति की. यू तो देश में   मंदी छायी हुई है जिसके कारण न तो कोई रोजगार का निर्माण हो रहा है . जिसके चलते आधे से ज्यादा लोगों ने अपनी नौकरी गंवा दी है . दूसरी तरफ देश में लगातार मुद्दा का मूल्य कम हो रहा है जिसके कारण मंहगाई बढ़ रही है जो चीज दस की आती वो बीस से पच्चीस रूपये की हो गयी है. जिसका असर लोगों पर यह पड़ा है कि लोगों की सैलरी तो नहीं बढ़ी लेकिन उसमें कटौती जरूर हो गयी है और उन्हें दो रोटी खाने की वजह एक रोटी से ही काम चलाना पड़ रहा है. आज जहाँ एक तरफ अमीर वर्ग और अमीर होता जा रहा है वही गरीब और भी गरीब होता जा रहा है. आज उन मध्यम वर्ग की हालत खराब हो गयी है जो पहले सुधरी थी. और सबसे नीचे तबके की  हालत और भी बुरी हो गयी है. दोस्तों ये न तो मुझे मालूम और न आपको कि कोरोना वायरस का वैक्सीन कब बनेगा और कब हमको लगेगा. किन्तु तब तक हमें उचित सामजिक दूरी तो रखनी होगी. साथ ही साथ  अपने घर को चलाने के लिए   अपने उन गुणों ...

परीक्षा

परीक्षा एक ऐसा शब्द जिसके लिए हर कोई बहुत गम्भीर होता है यू तो परीक्षा के मायने बहुत बदल गए हैं लेकिन आज भी परीक्षा क ई के लिए उनकी जिंदगी होती है. वैसे तो हम सब ने अपने बोर्ड परीक्षा को बहुत गम्भीर माना है किन्तु  आज हम केवल परीक्षा पढ़ाई के क्षेत्र में ही नहीं दे रहे हैं बल्कि हम हर उस क्षेत्र में दे रहे हैं जहाँ पर हम ये जानते हैं  कि वो काम सरल नहीं है किन्तु तब भी हम उसे करते हैं इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि हमारे सामने क ई बार ऐसी परिस्थिति आकर खड़ी हो जाती है जहाँ एक तरफ कुंआ तो दूसरी तरफ खायी होती है चारों तरफ परेशानी ही परेशानी  होती है और फिर हमें इस परीक्षा से स्वयं उबरना पड़ता है . आज इस विषय पर बात करते हुए मुझे  याद आया  है कि मैंने क ई साल पहले पढ़ा जिसमें  लिखा था " कि हमें अपने इम्तिहान का परचा स्वयं बनाना होता है और चेक भी स्वयं ही करना होता " जिसे में तब तो नहीं समझ पायी थी लेकिन अब कुछ इसके बारे में समझी हूँ.