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Showing posts from August 21, 2021

रक्षाबंधन

  श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है ∣ जिसको लेकर अलग - अलग लोक रिवाज और मान्यता है ∣ ये त्यौहार मुख्य रूप से भाई बहन का त्यौहार है ∣ जो उनके रिश्ते को और भी मजबूत करने वाला होता है ∣ जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा का वादा करता है ∣  इस त्यौहार को मनाने का अपना पौराणिक ओर ऐतिहासिक महत्व है ∣ जहाँ पर एक तरफ    महाभारत में द्रौपदी  के द्वारा श्री कृष्ण को राखी बांधने को वर्णन मिलता है ∣ तो वहीं दूसरी तरफ इतिहास के पन्नें पलटे तो रानी कर्मवती ने हुमायूँ को राखी बांधी थी  जिसमें हुमायूँ ने उनकी रक्षा का दायित्व अपने सिर पर लिया था  तो ऐसे हम राखी की उत्पत्ति को समझ सकते है ∣  आज वर्तमान समय में राखी न केवल एक त्यौहार है बल्कि भाई बहन के प्रेम को मजबूत करने की ऐसी डोर है जिसे कोई भी नहीं तोड़ सकता है ∣ तू चिनगारी बनकर उड़ री ,  जाग जाग मैं ज्वाल बनूँ ,  तू बन जा हहराती गंगा ,  मैं झेलम बेहाल बनें ;  आज बसन्ती चोला तेरा ,  मैं भी सज लूँ लाल बनूँ ;  तू भगिनी बन...

पिंजरा

  जब मूलभूत अधिकार को भी छिन लिया जाए ओर केवल नाममात्र की स्वतंत्रता दी जाएं तो वो जिंदगी  सिर्फ एक पिंजरे के समान हो जाती है ∣ जो सिर्फ और सिर्फ क ई तरह की कुरीतियों और रूढ़िवादी सोच से जकड़ी हुई होती है ∣ जिसकी गिरफ्त में रहना जैसे किसी काल कोठरी में रहना है ∣  जहाँ पर नैसर्गिक अधिकार तक नहीं मिल पाते नागरिक अधिकारों की तो बात दूसरी है ∣  आज 21 शताब्दी के दौर में हाल ही हुई घटनाओं को देखकर ऐसा लगता है मानों उसने महिलाओं को पिंजरे का तोता बनाकर रख दिया है ∣  जहाँ पर वो केवल जीवित एक वस्तु है इसके अलावा और कुछ भी नहीं उन्हें शिक्षा तक के अधिकार तक से वंचित करने में किसी तरह का को ई परहेज नहीं किया जा रहा है अन्य की तो बात दूसरी है ∣