रक्षाबंधन

 

श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है ∣ जिसको लेकर अलग - अलग लोक रिवाज और मान्यता है ∣


ये त्यौहार मुख्य रूप से भाई बहन का त्यौहार है ∣ जो उनके रिश्ते को और भी मजबूत करने वाला होता है ∣

जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा का वादा करता है ∣ 

इस त्यौहार को मनाने का अपना पौराणिक ओर ऐतिहासिक महत्व है ∣ जहाँ पर एक तरफ 

  महाभारत में द्रौपदी  के द्वारा श्री कृष्ण को राखी बांधने को वर्णन मिलता है ∣ तो वहीं दूसरी तरफ इतिहास के पन्नें पलटे तो रानी कर्मवती ने हुमायूँ को राखी बांधी थी 

जिसमें हुमायूँ ने उनकी रक्षा का दायित्व अपने सिर पर लिया था 

तो ऐसे हम राखी की उत्पत्ति को समझ सकते है ∣ 

आज वर्तमान समय में राखी न केवल एक त्यौहार है बल्कि भाई बहन के प्रेम को मजबूत करने की ऐसी डोर है जिसे कोई भी नहीं तोड़ सकता है ∣


तू चिनगारी बनकर उड़ री , 

जाग जाग मैं ज्वाल बनूँ ,

 तू बन जा हहराती गंगा , 

मैं झेलम बेहाल बनें ;

 आज बसन्ती चोला तेरा , 

मैं भी सज लूँ लाल बनूँ ;

 तू भगिनी बन क्रान्ति कराली ,

 मैं भाई विकराल बनूँ ; 

यहाँ न कोई राधारानी ,

 वृन्दावन , वंशीवाला ; तू आँगन

 की ज्योति बहन री ,

 मैं घर का पहरे वाला ।


**गोपाल सिंह की कविता 

(भाई बहन की पंक्ति) 


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