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Showing posts from May 19, 2024

law failure to comply: कानून की दहलीज तले, दम तोड़ते लोग

कानून जो सबके लिए समान होता है। जिसके आगे न कोई राजा न कोई रंक होता है।  ये कहने में जितना आसान लगता है उतना वास्तव में होता नहीं है। जहां अक्सर कानून के आगे एक सामान्य नागरिक हार सा जाता है।  अफसोस जब तक वो ये सब समझ पाता है। तब तक कानून के आगे वो खुद को बौना पाता है। जहां कानून शब्दावली के बीच उलझकर रह जाता है।  लाचार व्यवस्था के आगे वो शोषण का शिकार हो जाता है। जहां खुद को निर्दोष बताने के कोशिश में उसका पूरा जीवन निकल जाता है। कई बार तो नौबात यहां तक आ जाती है । कि वो न्याय न मिलने के चलते अपनी ही जिंदगी खत्म कर लेता है। कई बार उन्हें चुप करने के लिए किसी साजिश के तहत मौत के घाट उतार दिया जाता है। ऐसे में सवाल यहीं है कि क्या आज देश की न्याय प्रणाली सच में लाचार हो गयी है। जहां न्याय की कोई आश नहीं है। हालांकि देश का सर्वोच्च न्यायालय न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। किन्तु जब कोर्ट की अवमानना की जाने लगे। तब क्या कहां जा सकता है।