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law failure to comply: कानून की दहलीज तले, दम तोड़ते लोग




कानून जो सबके लिए समान होता है। जिसके आगे न कोई राजा न कोई रंक होता है।  ये कहने में जितना आसान लगता है उतना वास्तव में होता नहीं है। जहां अक्सर कानून के आगे एक सामान्य नागरिक हार सा जाता है। 

अफसोस जब तक वो ये सब समझ पाता है। तब तक कानून के आगे वो खुद को बौना पाता है। जहां कानून शब्दावली के बीच उलझकर रह जाता है। 
लाचार व्यवस्था के आगे वो शोषण का शिकार हो जाता है। जहां खुद को निर्दोष बताने के कोशिश में उसका पूरा जीवन निकल जाता है।

कई बार तो नौबात यहां तक आ जाती है । कि वो न्याय न मिलने के चलते अपनी ही जिंदगी खत्म कर लेता है। कई बार उन्हें चुप करने के लिए किसी साजिश के तहत मौत के घाट उतार दिया जाता है।

ऐसे में सवाल यहीं है कि क्या आज देश की न्याय प्रणाली सच में लाचार हो गयी है। जहां न्याय की कोई आश नहीं है।
हालांकि देश का सर्वोच्च न्यायालय न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। किन्तु जब कोर्ट की अवमानना की जाने लगे। तब क्या कहां जा सकता है। 


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..