"रहिमन पानी राखिये , बिन पानी सब सून पानी गये न ऊबरे मोती ,मानुष, चून। " जल है तो कल है अक्सर हम ये लाइन सूनते रहते हैं लेकिन उसकी कीमत केवल जब ही समझ पाते हैं जब घर में नल न आऐ हो। तब पानी का बहुत सोच समझ कर उपयोग करते हैं । पानी एक प्राकृतिक संसाधन हैं जो निश्चित मात्र में ही उपलब्ध है लेकिन हमारी बढ़ती जनसंख्या ने इस पर एक प्रश्न सा खड़ा कर दिया है कि आने वाले समय में लोगों को पीने योग्य पानी उपलब्ध होगा कि नहीं। समकालीन समय में कई लोगों के पलायन का कारण केवल पानी है लेकिन आज हम सब लोग इसकी उपयोगिता को जानते हुए भी इसकी कीमत नहीं समझ पा रहे हैं आज भी हमारे देश के क ई ऐसे लोग है जो खराब पानी पीने को विवश है। हम पानी बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाऐ ये हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। हमारी धरती जिसने हमें शुध्द जलवायु रहने लायक वातावरण और शुध्द हवा दी उसे आ...
वो बात जो जरूरी है