जब जिंदगी जीना ही है तो क्यों मायूस होकर काटे दिन ? जब चलना ही रास्ते पर तो क्यों लंगड़ा कर चले हम? जब कर लिया है खुद से वादा खुद को बनाने का तो औरों के खातिर अपने सपनों को कुर्बान करे क्यों? थोड़े दर्द थोड़े आसूं सब को मिलते जिंदगी में किन्तु रोते रोते दिन काटे क्यों? जब मिली है जिंदगी जीने को तो ज्यादा पाने के चक्कर में खुद को बांटे क्यों ? जब जिंदगी जीना है तो क्यों न उसे खुश होकर जीएं किसी को उदासी बांटे क्यों? राह में नहीं मिलते किसी को फूल किन्तु कांटो को देकर दूसरों को दर्द बांटे क्यों? यू ही जिंदगी में नहीं मिलता कुछ किसी भी चीज क़ो पाने के लिए किम्मत है देनी पड़ती किन्तु उस कीमत का डंका हर किसी को पीटे क्यों ? जब जीना ही जिंदगी थोड़े दुख और थोड़े सुख के साथ तो चेहरे के गम को किसी और को दिखाए क्यों? चले करे कोशिश एक नयी सुबह थोड़ी धूप से पांव पीछे क्यों?
वो बात जो जरूरी है