आज के समय सृजन का मतलब है किसी चीज का निर्माण करना तो कभी शब्दों के साथ खेलना . हमारे चारो तरफ सृजन ही 🌸 सृजन है क भी वो किसी कला के रूप में तो कभी वो किसी निर्माण के रूप में लेकिन इस चीज में हम हमेशा कुछ चीजों को काम सा आंकते है जो अच्छा लिखते हैं वो सोचते हैं बोलना तो लिखने से सरल होता है और जो बोलते है तो वो सोचते हैं कि लिखना तो बोलने से सरल होता है किन्तु वो दोनों इस चीज को जब समझते हैं जब उन्हें लिखना और बोलना दोनों होता है . इसलिए तो कहा जाता हैं कि किसी भी चीज का सृजन करने के लिए कठिन मेहनत की जरूरत होती है जैसे मिट्टी को वैसे तो लोग तुच्छ वस्तु समझते हैं लेकिन इसके सही उपयोग से एक कुम्हार मिट्टी का घड़ा बनाता है .🍀 दूसरी तरफ खाना बनाना जिसे लोग बहुत सरल सा समझते है लेकिन जब स्वयं लोग खाना बनाते हैं तब उन्हें मालूम चलता है कि खाना बनाना भी मुश्किल होता है. सृजन कहाँ नहीं ❄ ❄ वो कभी खाना बनाने में दिखता है तो कभी कुछ शब्द गढ़ने में त़ो कभी तो चार शब्दों...
वो बात जो जरूरी है