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Showing posts from December 20, 2020

चीजे जैसी दिखती है वैसी होती नहीं

  क ई बार हमें जिस तरह की चीजें दिखती है वो वैसी होती नहीं है साउथ मूवी' भागमती 'भी कुछ ऐसी ही मूवी है जो मूवी के शुरू से ही ऐसी लगती है कि वो भूतीय मूवी है जबकि वो भूतीय होती नहीं है .   इसमें मूवी में   मंत्री ईश्वर प्रसाद जो  जनता का भगवान  बनने की कोशिश में लगा हैं जो अपने आप को सच्चा साबित करने के चक्कर में  इस मूवी की मुख्य खिलाड़ी आईएएस चंचला जिसका उपयोग कर उसके प्रेमी को ही उसके हाथों से मराने को विवश कर देता हैं वो जब अपने प्रेमी को जान से मराने  के लिए जेल जाती है तब सीबीआई ईश्वर प्रसाद की के बारे में पूछताछ के लिए चंचला को      रानी भागमती के महल ले जाते हैं जहाँ वो बड़ी चालाकी से अपने आप को रानी भागमती के भूत लगे सा दिखती है.  मूवी के खत्म होते होते हमें ये मालूम चलता है कि ये चंचला पूरी तरह से नाटक कर रही थी और वो मंत्री ईश्वर प्रसाद जो खुद को बहुत ईमानदार पेश करता है वो ही मूर्तियों की चोरी करता है इस मूवी की कहानी के अंत में हम दर्शकों को एक गहरा संदेश दिया जाता है कि मनुष्य जीतना भूत पर विश्वास करता है उतना...

कोई नहीं

  समय से बड़ा कोई शिक्षक नहीं हार से बड़ी कोई सीख नहीं अपमान से बड़ा कुछ नहीं सम्मान से ऊंचा कोई नहीं धैर्य से बड़ा कोई शास्त्र नहीं मौन से बड़ा कोई अस्त्र नही धन से बड़ा कोई दुश्मन दोस्ती से बड़ी कोई ताकत नही अपने से ज्यादा कोई सच्चा नहीं झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं सत्य से बड़ी कोई राह नहीं रिश्ते से बड़ी कोई डोर नहीं अनुभव से बड़ा कोई उपहार नहीं दुख से बड़ा कोई पहाड़ नहीं खुशी से बड़ी कोई जड़ी बूटी नहीं रोग से बड़ा कोई वियोग नहीं प्रेम से बड़ा कोई रोग नहीं विद्या से बड़ा कोई ज्ञान नहीं एकता से बड़ी कोई ताकत नहीं.