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चीजे जैसी दिखती है वैसी होती नहीं


 क ई बार हमें जिस तरह की चीजें दिखती है वो वैसी होती नहीं है साउथ मूवी' भागमती 'भी कुछ ऐसी ही मूवी है जो मूवी के शुरू से ही ऐसी लगती है कि वो भूतीय मूवी है जबकि वो भूतीय होती नहीं है . 

 इसमें मूवी में   मंत्री ईश्वर प्रसाद जो  जनता का भगवान  बनने की कोशिश में लगा हैं जो अपने आप को सच्चा साबित करने के चक्कर में इस मूवी की मुख्य खिलाड़ी आईएएस चंचला जिसका उपयोग कर उसके प्रेमी को ही उसके हाथों से मराने को विवश कर देता हैं वो जब अपने प्रेमी को जान से मराने  के लिए जेल जाती है तब सीबीआई ईश्वर प्रसाद की के बारे में पूछताछ के लिए चंचला को

     रानी भागमती के महल ले जाते हैं जहाँ वो बड़ी चालाकी से अपने आप को रानी भागमती के भूत लगे सा दिखती है.

 मूवी के खत्म होते होते हमें ये मालूम चलता है कि ये चंचला पूरी तरह से नाटक कर रही थी और वो मंत्री ईश्वर प्रसाद जो खुद को बहुत ईमानदार पेश करता है वो ही मूर्तियों की चोरी करता है इस मूवी की कहानी के अंत में हम दर्शकों को एक गहरा संदेश दिया जाता है कि मनुष्य जीतना भूत पर विश्वास करता है उतना किसी और पर नहीं.



लोग जैसे दिखते है वो वैसे ही ईमानदार हो ऐसा जरूरी नहीं.

इस मूवी की पटकथा बहुत अच्छी लिखी गयी है ये मूवी पाठकों को बांधने में पूरी तरह से सक्षम है साथ ही दर्शकों की जिज्ञासा को ये मूवी शुरू से आता तक बढ़ाती है.

अगर आप इस भूतिया मूवी देखना पसंद करते हैं तो इस मूवी को जरूर देखिए.

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